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आईआईएम इंदौर में ईएफपीएम की दसवीं बैच आरंभ
आईआईएम इंदौर में एग्जीक्यूटिव फैलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (ईएफपीएम) के दसवें बैच का वर्चुअल उद्घाटन18 जुलाई, 2020 को हुआ । यह कार्यक्रम मुख्य अतिथि प्रोफेसर रामाधर सिंह, प्रोफेसर, अहमदबाद विश्वविद्यालय;प्रोफेसर हिमांशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर और प्रोफेसर संजीव त्रिपाठी, अध्यक्ष, एफपीएम, आईआईएम इंदौर की मौजूदगी में हुआ ।
प्रोफेसर राय ने अपने स्वागत भाषण में प्रतिभागियों को जीवन में एक ‘उद्देश्य’ रखने और उसका सदैव पालन करने की सलाह दी । उन्होंने कहा कि हमेशाअपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और याद रखें की इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने के पीछे उनका क्या उद्देश्य है ।
प्रोफेसर राय ने कहा कि आईआईएम इंदौर के मिशन स्टेटमेंट के तीन मुख्य वाक्यांश – प्रासंगिक रहना, विश्व स्तरीय और सामाजिक रूप से सचेत रहना है। ‘ईएफपीएम आज के समय में बेहद महत्त्व रखता है क्योंकि यह शिक्षासे जुड़े लोगों के लिए मायने रखता है और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देता है—यह इसके प्रासंगिक बनता है ।
कार्यक्रम की संरचना और अध्ययन सामग्री बेहतरीन है यह इसलिए इसे विश्व स्तरीय बनाती है। यह कार्यक्रम आईआईएमइंदौर द्वारा पेश किया जा रहा है, जो हमेशा सामाजिक रूप से जागरूक रहाहै और समाज, राष्ट्र और दुनिया में योगदान देने के लिए तत्पर है।’, उन्होंने बताया । उन्होंने प्रतिभागियों को ऐसे विषय पर शोध करने की सलाह दी जो जिससे वे जुड़ाव महसूस करते हैं ।
उन्होंने कहा कि अपने मार्गदर्शक के रूप में ऐसे व्यक्ति को खोजें जो इस विषय के बारे में उतना ही उत्साहित होता है जितना कि शोधकर्ता । उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एक शोध तभी मायने रखता है जब वह किसी के लिए उपयोगी हो।

प्रोफेसर सिंह ने अनुसंधान, शोधकर्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं, प्रभावशीलता मानदंड और राष्ट्र में अनुसंधान की छवि पर अंतर्दृष्टि साझा की। ‘मेरा मानना है कि अनुसंधान यथास्थिति पर सवाल उठा रहा है और एक बेहतर विकल्प पेश कर रहा है’ उन्होंने कहा ।
प्रत्येक शोधकर्ता को ज्ञान या अभ्यास में स्थायी योगदान देने का आनंद लेने के लिए एक शोध में निवेश करना चाहिए। शोध प्रबंध के बारे में चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि यदि किसी का शोध अनुसंधान के सभी मानदंडों को पूरा नहीं करता है, तो यह उतनाचिंताजनक नहीं है– लेकिन ऐसाशोध करें कि शोधकर्ता को अपने काम पर गर्व महसूस होना चाहिए।
जिस विषय पर आप काम कर रहे हैं, उसके बारे में भावुक रहें और किसी ऐसे व्यक्ति के साथ काम करें जो आपके शोध औरप्रासंगिकता को समान महत्व देता है ’, उन्होंने कहा।
इस सत्र में आईआईएमइंदौर के संकाय सदस्यों के साथ नए बैच के 35 पंजीकृत प्रतिभागियों ने भाग लिया।


